Republic Day 2026: हर भारतीय के लिए बेहद खास है 26 जनवरी

Republic Day 2026 हर साल 26 जनवरी का इंतजार हर भारतीय को रहता है। ऐसे में इससे जुड़े फैक्ट हम आपको बताएंगे, क्योंकि इसकी जानकारी हर भारतीय को होनी चाहिए। भारतीयों के लिए 26 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की ताकत का प्रतीक है। इसी दिन भारत ने खुद को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। हर साल इस दिन भव्य परेड, झांकियां और देशभक्ति से भरे कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपे कई दिलचस्प और कम चर्चित किस्सों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों चुना गया, संविधान लागू होने में कितना समय लगा और पहली परेड से जुड़े कौन से रोचक तथ्य हैं…….ये सभी बातें इस दिन को और भी खास बनाती हैं।
इतिहास के पन्नों में दर्ज ये किस्से न सिर्फ हमें आजादी के संघर्ष की याद दिलाते हैं, बल्कि ये भी बताते हैं कि भारत का संविधान कितना विचारपूर्ण और मजबूत है। आइए जानते हैं 26 जनवरी से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य, जो शायद आपने पहले कभी न सुने हों।

पहला गणतंत्र दिवस समारोह कहां हुआ था | Republic Day 2026


Republic Day 2026 बहुत कम लोग जानते हैं कि पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन कर्तव्य पथ पर नहीं हुआ था। साल 1950 में इसका पहला आयोजन दिल्ली के इरविन स्टेडियम में किया गया था, जिसे आज मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम कहा जाता है। इसी कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला।

Republic Day 2026

26 जनवरी को ही क्यों लागू हुआ संविधान

Republic Day 2026 भारत का संविधान तैयार तो नवंबर 1949 में ही हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए जानबूझकर 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई। इसकी वजह यह थी कि 26 जनवरी 1930 को देश ने आज़ादी के लक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। इस ऐतिहासिक तारीख को सम्मान देने के लिए गणतंत्र बनने का दिन भी यही रखा गया।  

Republic Day 2026

शौर्य और परंपरा का संगम

Republic Day 2026 26 जनवरी को देश को गौरवान्वित करने वाले नागरिकों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा जाता है। परेड के दौरान राष्ट्रगान के समय दी जाने वाली तोपों की सलामी और हवाई सम्मान भी इस दिन की खास पहचान है, जिसमें ऐतिहासिक हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। 

परेड के पीछे की महीनों लंबी मेहनत

गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं होती। इसकी तैयारी हर साल  कई महीनों पहले से शुरू हो जाती है। इसमें शामिल जवान रोजाना कठिन अभ्यास करते हैं और परेड वाले दिन तड़के सुबह आयोजन स्थल पर पहुंच जाते हैं। इस समारोह को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

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Hindu Nav Varsh 2026: हिन्दू नव वर्ष कब से शरू होगा 2026 में

Hindu Nav Varsh 2026 नव वर्ष 1 जनवरी को नही 19 मार्च को है हिंदू धर्म में वर्ष की शुरुआत वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। हिंदू नववर्ष 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से होगी।

Hindu Nav Varsh 2026 | हिन्दू नव वर्ष 2026

Hindu Nav Varsh 2026 हर वर्ष की तरह जब दुनिया 1 जनवरी को नए वर्ष का स्वागत करती है, उसी बीच हिंदू पंचांग की परंपरा के अनुसार एक अलग, गहन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध नया साल आता है जिसे हिंदू नववर्ष (Hindu Nav Varsh) कहा जाता है। यह वही समय है जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रथम प्रतिपदा तिथि के साथ नया संवत्सर आरंभ होता है। जो 2026 में एक विशेष दिन 19 मार्च को पड़ रहा है। हिंदू नववर्ष की तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है, जो हमारे सांस्कृतिक परंपरा की एक शुरुआत मानी जाती है।

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हिंदू नववर्ष 2026 की तिथि | Hindu New Year 2026 Date

Hindu Nav Varsh 2026 साल 2026 में हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रहा है। यह तिथि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार नया वर्ष आरंभ करने की तिथि मानी जाती है। इस दिन से विक्रम संवत 2083 की आधिकारिक शुरूआत होगी। इसके अलावा यह दिन ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि निर्माण का शुरुआती समय भी माना जाता है।

विक्रम संवत 2083

Hindu Nav Varsh 2026 हर संवत्सर का अपना नाम, ग्रह पुरोहित और शुभ ग्रह होते हैं। इसी क्रम में वर्ष 2083 को कई ज्योतिषियों के अनुसार रौद्र (Roudra) भी कहा जा रहा है, जिसमें बृहस्पति (गुरु) को राजा ग्रह और मंगल को मंत्री ग्रह के रूप में माना जाता है। साल 2083 में अधिकमास भी पड़ेगा। जिसका अर्थ है एक अतिरिक्त माह जो इस संवत के अनुभव और भी गहन धार्मिक साधना, दान-धर्म और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त बनाएगा।

हिंदू नव वर्ष का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

Hindu Nav Varsh 2026 हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व गहरी जड़ों वाला है, जो प्रकृति, धर्म और इतिहास से जुड़ा है; यह चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, जो नवीनीकरण, बुराई पर अच्छाई की जीत, ऋतु परिवर्तन, फसलों की कटाई, और नए आध्यात्मिक संकल्पों का प्रतीक है, जिसमें ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचना और भगवान राम के राज्याभिषेक जैसे ऐतिहासिक क्षण भी शामिल हैं, जो इसे आत्म-चिंतन और सकारात्मक ऊर्जा का अवसर बनाते हैं। 

हिंदू नव वर्ष का आध्यात्मिक महत्व

  • नवीनीकरण और आत्म-चिंतन: यह जीवन में नए सिरे से शुरुआत करने, आध्यात्मिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और सकारात्मक इरादे तय करने का समय है, जो पिछले संघर्षों को छोड़कर आगे बढ़ने का प्रतीक है।
  • नवरात्र का प्रारंभ: यह चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होता है, जो माँ दुर्गा की उपासना और शक्ति की पूजा के लिए विशेष है, जिससे घर और मन में पवित्रता आती है।
  • ब्रह्मांडीय जुड़ाव: मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, जिससे यह दिन ब्रह्मांडीय ऊर्जा और जीवन के नवीनीकरण से जुड़ जाता है।
  • सतभक्ति और ज्ञान: यह सतगुरु के माध्यम से शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने और मनुष्य जीवन के उद्देश्य को पूरा करने का अवसर है, जिससे जीवन सफल हो सके। 

हिंदू नव वर्ष का सांस्कृतिक महत्व

ऋतु परिवर्तन: यह वसंत ऋतु की शुरुआत होती है, जब प्रकृति में नए पत्ते आते हैं और वातावरण नवीन ऊर्जा से भर जाता है, जो वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। (Hindu Nav Varsh 2026)

  • कृषि और फसल: किसान अपनी मेहनत के फल (नई फसल) की कटाई के समय को मनाते हैं, प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जो इसे कृषि चक्र से जोड़ता है।
  • ऐतिहासिक घटनाएँ: इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने राज्य स्थापित किया, श्री राम का राज्याभिषेक हुआ, और आर्य समाज की स्थापना हुई, जो इसे गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है।
  • सामुदायिक जुड़ाव: यह परिवार और समुदायों को एक साथ लाता है, जहाँ साझा परंपराओं और मूल्यों का आनंद लिया जाता है, जैसे विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरीकों से मनाना (गुड़ी पड़वा, बैसाखी, बिहू, आदि)।
  • सात्विक वातावरण: पाश्चात्य नव वर्ष के विपरीत, यह व्रत, पूजा-पाठ, दान और सात्विक भोजन से शुरू होता है, जिससे घर-घर में शुद्ध और सकारात्मक माहौल बनता है। 

इस प्रकार, हिंदू नव वर्ष केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव है जो प्रकृति, इतिहास और व्यक्तिगत नवीनीकरण से जुड़ा है। 

Diwali Date 2026: 2026 में दिवाली कब है | जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Diwali Date 2026: दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है.2026 में दिवाली कब मनाई जाएगी, इसकी सही तारीख क्या है, हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार को विशेष माना गया है. कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी मां की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.

पौराणिक मान्यता है कि इस दिन श्रीराम 14 साल का वनवास कर अयोध्या लौटे थे इस खुशी में दीपावली मनाई गई. दिवाली के 5 दिन का त्योहार धनतेरस से शुरू हो जाता है और भाई दूज तक रहता है. 2026 में दिवाली कब मनाई जाएगी, अभी से जान लें सही तारीख मुहूर्त.

 Diwali Date 2026 में कब है इस लेख में हम सब जानकारी देने वाले हैं .इसके लिए आपको इस लेख को पूरा पढ़ना होगा | चलिए बताते हैं विस्तार से 

2026 में दिवाली कब है | Diwali Date 2026

 Diwali Date 2026 दिवाली, रोशनी का त्योहार, आशा, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 2026 में दिवाली का त्यौहार 8 नवम्बर को मनाया जाएगा।

  • धनतेरस: 6 नवंबर, शुक्रवार.
  • दिवाली (लक्ष्मी पूजन): 8 नवंबर, रविवार.
  • गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर, मंगलवार.
  • भाई दूज: 11 नवंबर, बुधवार. 

दिवाली पूजा मुहूर्त

Diwali Date 2026 – 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को है, और लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में, खासकर वृषभ काल (शाम 5:55 बजे से 7:51 बजे तक) होगा, जो स्थिर लग्न (वृषभ) में आता है, जिससे धन-संपत्ति घर में स्थिर रहती है; न्यू दिल्ली के लिए मुख्य मुहूर्त शाम 5:55 बजे से 7:51 बजे तक है, जिसमें वृषभ काल (5:55 PM – 7:51 PM) सबसे उत्तम है, और महानिशीथ काल (रात 11:38 PM – 12:31 AM) भी विशेष माना जाता

  • लक्ष्मी पूजा (प्रदोष काल/वृषभ काल): शाम 05:55 बजे से शाम 07:51 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 55 मिनट).
  • प्रदोष काल: शाम 05:31 बजे से रात 08:08 बजे तक.
  • महानिशीथ काल (तांत्रिक पूजा के लिए): रात 11:38 बजे से रात 12:31 बजे तक (अवधि: 52 मिनट).
  • स्थिर लग्न (वृषभ): शाम 05:55 बजे से शाम 07:51 बजे तक (यह पूजा के लिए सबसे शुभ समय है)

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Diwali 2026 Calendar | दिवाली 2026 कैलेंडर

Diwali Date 2026 – 2026 में दिवाली कब है

  • 6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस (Dhanteras)
  • 8 नवंबर, रविवार: दिवाली (Diwali) / नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi)
  • 10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)
  • 11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज (Bhai Dooj) 

दिवाली के दिन करें ये शुभ काम

  • दीवाली या लक्ष्मी पूजा के दिन, हिन्दु अपने घरों और दुकानों को गेंदे के फूल की लड़ियों व अशोक, आम तथा केले के पत्तों से सजाते हैं. (Diwali Date 2026)
  • इस दिन कलश में नारियल स्थापित कर, उसे घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखने को शुभ माना जाता है.
  • दिवाली के दिन सफाई का भी विशेष महत्व है. क्योंकि लक्ष्मी मां भी उसी घर में प्रवेश करती हैं जिस घर में साफ-सफाई होती है.
  • लक्ष्मी पूजा के लिए, पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, उस पर श्री गणेश और देवी लक्ष्मी की सुन्दर रेशमी वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित मूर्तियों को स्थापित किया जाता है और फिर पूजन करें. (Diwali Date 2026)
  • शाम को लक्ष्मी पूजा के साथ ही जलते हुए दीपकों की भी पूजा की जाती है. घर और आंगन में सब जगह दीपक लगाएं.

 FAQ

धनतेरस का महत्व क्या है?

धनतेरस दिवाली के जश्न की शुरुआत का प्रतीक है और यह भगवान धन्वंतरि को समर्पित है, जो स्वास्थ्य और उपचार के देवता हैं। यह समृद्धि लाने के लिए नई चीजें, खासकर धातु खरीदने का दिन है।

क्या दिवाली, धनतेरस और अन्य संबंधित दिन भारत में सार्वजनिक अवकाश हैं?

हां, दिवाली और धनतेरस भारत के कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश हैं, हालांकि यह क्षेत्रीय आधार पर अलग-अलग होता है। छोटी दिवाली, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे अन्य दिन कुछ क्षेत्रों में अवकाश के रूप में मनाए जा सकते हैं।

गोवर्धन पूजा कैसे मनाई जाती है?

गोवर्धन पूजा गोवर्धन पर्वत की पूजा करके मनाई जाती है, जो भगवान कृष्ण द्वारा गोकुल के लोगों को मूसलाधार बारिश से बचाने का प्रतीक है। भक्त भोजन, मिठाई चढ़ाते हैं और गाय के गोबर से बना एक प्रतीकात्मक पर्वत तैयार करते हैं।

 

 

छोटी दिवाली कब मनाई जाती है?

छोटी दिवाली दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है,

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि deoriaprimes.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Gorakhnath Mandir: गोरखनाथ मंदिर का इतिहास | घूमने का सही समय

Gorakhnath Mandir, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है Gorakhnath Mandir एक प्रमुख हिन्दू तीर्थ स्थल है। Gorakhnath Mandir मंदिर नाथ सम्प्रदाय के महान योगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिनका योगदान भारतीय दर्शन, योग और साधना में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल एक धार्मिक केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का सजीव प्रतीक भी है। Gorakhnath Mandir हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है। हर साल लाखों लोग इस मंदिर में दर्शन और साधना के लिए आते हैं। आइए विस्तार से जानें गोरखनाथ मंदिर का इतिहास, महत्व, उसकी वास्तुकला, त्योहार, और मंदिर देखने का सही समय।

गोरखनाथ मंदिर का इतिहास | Gorakhnath Mandir History

गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) का इतिहास लगभग 900 वर्ष पुराना माना जाता है। इसे गोरखनाथ जी की तपोभूमि माना जाता है। यह कहा जाता है कि स्वयं गुरु गोरखनाथ ने इस स्थान पर कई वर्षों तक तपस्या की थी। बाद में यहां एक मठ की स्थापना की गई, जो धीरे-धीरे एक भव्य मंदिर में परिवर्तित हो गया।

मुगल शासनकाल में Gorakhnath Mandir को कई बार क्षतिग्रस्त किया गया लेकिन नाथ संप्रदाय के साधुओं और स्थानीय भक्तों ने इसे बार-बार पुनर्निर्मित किया। यह मंदिर सांप्रदायिक एकता का प्रतीक भी बन गया क्योंकि हिन्दू और मुसलमान दोनों ही गुरु गोरखनाथ के अनुयायी रहे हैं।

ब्रिटिश काल में भी गोरखनाथ मंदिर एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बना रहा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मंदिर के साधुओं ने भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनजागरण का काम किया। आजादी के बाद यह मंदिर तेजी से विकसित हुआ और अब यह उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों में शामिल है।

गोरखनाथ कौन थे? | Who was Gorakhnath?

गुरु गोरखनाथ एक महान योगी और नाथ संप्रदाय के प्रमुख गुरु थे। उनका जन्म 11वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। वे गुरु मत्स्येन्द्रनाथ के शिष्य थे और ‘हठयोग’ के संस्थापक माने जाते हैं। उन्होंने तपस्या, ध्यान और योग के माध्यम से कई चमत्कार किए, और जीवन के रहस्यों को सुलझाने में महारत हासिल की।

गोरखनाथ जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को हटाने का कार्य किया और सभी जातियों और धर्मों के लोगों को ज्ञान और भक्ति की राह पर चलने की प्रेरणा दी।

गोरखनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

  1. Gorakhnath Mandir नाथ संप्रदाय का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां से ही इस सम्प्रदाय के विभिन्न आश्रमों और मठों का संचालन होता है।
  2. यह स्थान सिद्ध भूमि माना जाता है। यहां की मिट्टी और वातावरण को दिव्य माना जाता है।
  3. भक्त मानते हैं कि Gorakhnath Mandir में दर्शन करने से दुख-दर्द दूर होते हैं, और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

गोरखनाथ मंदिर की वास्तुकला

गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है। इसमें ऊँचा शिखर, भव्य द्वार, विशाल मंडप और गर्भगृह प्रमुख हैं।

  • मुख्य गर्भगृह: जहां गुरु गोरखनाथ जी की मूर्ति स्थापित है।
  • ध्यान कक्ष: जहां साधक ध्यान एवं साधना करते हैं।
  • अखाड़ा एवं मठ: जहां नाथ संप्रदाय के योगी रहते हैं।
  • यज्ञशाला: धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष स्थान।
  • संग्रहालय और पुस्तकालय: जिसमें नाथ परंपरा से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियाँ हैं।

गोरखनाथ मंदिर में दर्शन का सही समय

समयविवरण
सुबह 4:00 – 12:00मंगला आरती, ध्यान, पूजा
दोपहर 1:00 – 3:00मंदिर बंद रहता है
शाम 4:00 – 9:00संध्या आरती, दर्शन और प्रवचन

गोरखनाथ मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय

गोरखनाथ मंदिर की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे उपयुक्त होता है। इस समय मौसम सुहावना होता है और त्योहारों की धूम भी रहती है।

गोरखनाथ मंदिर के प्रमुख पर्व और मेले

1. मकर संक्रांति मेला:

हर साल जनवरी में आयोजित होता है। लाखों श्रद्धालु इस मेले में भाग लेते हैं। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा है।

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2. गुरु पूर्णिमा:

गुरु को समर्पित यह पर्व यहां विशेष रूप से मनाया जाता है। श्रद्धालु गुरु चरणों में वंदना करते हैं।

3. श्रावण मास:

भगवान शिव के प्रिय मास में हर सोमवार को विशेष पूजन होता है। भव्य जलाभिषेक किया जाता है।

कैसे पहुँचे गोरखनाथ मंदिर

अगर आप Gorakhnath Mandir मंदिर का दर्शन का प्लान बना रहे हैं तो आप विभिन्न तरीके से यहाँ पर दर्शन के लिए आ सकते हैं –

रेल मार्ग:

आप भारत के किसी भी कोने में हों तब भी आप यहाँ पर आ सकते है यहाँ पर विश्व का सबसे लम्बा रेलवे स्टेशन है यहाँ पर आने के बाद स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है | यहाँ से Gorakhnath Mandir जाने के लिए ऑटो , टैक्सी आसानी से मिल जाता है

हवाई मार्ग:

निकटतम हवाई अड्डा – गोरखपुर एयरपोर्ट (10 किमी)

🚆 रेल मार्ग:

गोरखपुर रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 4 किमी है। ऑटो, टैक्सी उपलब्ध हैं।

🚌 सड़क मार्ग:

उत्तर प्रदेश के किसी भी कोने से गोरखपुर के लिए बसें चलती हैं। नेशनल हाईवे से अच्छी कनेक्टिविटी है।

गोरखनाथ मंदिर के पास ठहरने की व्यवस्था

मंदिर के आसपास कई होटल, धर्मशालाएं और अतिथि गृह मौजूद हैं:

  • गोरखनाथ धर्मशाला (सीधे मंदिर प्रबंधन द्वारा संचालित)
  • यूपी टूरिज्म गेस्ट हाउस
  • होटल क्लार्क, होटल रॉयल रेजीडेंसी जैसे कई प्राइवेट होटल भी उपलब्ध हैं।

TNPSC:तमिलनाडु संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समूह-4 का रिजल्ट जारी

TNPSC Group 4 Result 2025: तमिलनाडु लोक सेवा आयोग ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समूह 4 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। संबंधित उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर परिणाम देख सकते हैं।

तमिलनाडु संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समूह-4 का रिजल्ट जारी | TNPSC Group 4 Result 2025

तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) ने आज 22 अक्तूबर को टीएनपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समूह 4 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। उम्मीदवार अब अपने लॉगिन विवरण का उपयोग करके आधिकारिक वेबसाइट tnpsc.gov.in पर परिणाम देख सकते हैं। इसके साथ ही उम्मीदवार अपनी रैंक और स्थिति भी देख सकते हैं।

जुलाई में हुई थी TNPSC परीक्षा

उम्मीदवार अपने पंजीकरण संख्या और जन्म तिथि विवरण का उपयोग करके अपने परिणाम तक पहुंच सकते हैं। टीएनपीएससी ग्रुप 4 परीक्षा 12 जुलाई को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित की गई थी।

आयोग राज्य सरकार में 3,935 प्रवेश स्तर की रिक्तियों की पेशकश करता है, जिसमें ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ), कनिष्ठ सहायक, टाइपिस्ट, आशुलिपिक, क्षेत्र सहायक और अन्य पद शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रिक्तियों की कुल संख्या 4,662 हो सकती है।

TNPSC Group 4 Result 2025

छात्र अपना परिणाम देखने और डाउनलोड करने के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • सबसे पहले टीएनपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट tnpsc.gov.in पर जाएं। 
  • टीएनपीएससी ग्रुप 4 रिजल्ट 2025 के लिए उपलब्ध लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना लॉगिन क्रेडेंशियल दर्ज करें।
  • भविष्य के संदर्भ के लिए स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और सहेजें।

अब आगे क्या होगा?

आयोग द्वारा टीएनपीएससी ग्रुप 4 परिणाम घोषित करने के बाद, उम्मीदवारों को उनके इच्छित पदों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम भर्ती से पहले, उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज मूल प्रारूप में साथ लाएं।


उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि टीएनपीएससी ग्रुप 4 भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी अन्य अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।

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