RSS क्या है? : RSS का गठन क्यों हुआ ,जाने इसका पूरा इतिहास

RSS क्या है? भारत में जब भी राष्ट्रवाद, राजनीति या सामाजिक संगठनों की बात होती है, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम अपने आप सामने आ जाता है।
कोई इसे राष्ट्र निर्माण की रीढ़ मानता है, तो कोई इसे विवादों से जोड़कर देखता है।

लेकिन सवाल यही है —
👉 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है?
👉 इसका गठन क्यों हुआ?
👉 और इसका इतिहास वास्तव में क्या कहता है?

RSS क्या है?| RSS Kya Hai in Hindi

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारत का एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी।
RSS खुद को राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा से जुड़ा स्वयंसेवी संगठन बताता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घोषित उद्देश्य:

  • समाज को संगठित करना
  • राष्ट्रभाव और देशभक्ति को मजबूत करना
  • भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण
  • अनुशासन और चरित्र निर्माण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है कि राजनीति से पहले समाज मजबूत होना चाहिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा क्या होती है |

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली की सबसे छोटी और अहम इकाई होती है — शाखा

शाखा में शामिल होता है:

  • शारीरिक व्यायाम
  • खेल-कूद
  • देशभक्ति गीत
  • विचार-विमर्श (बौद्धिक)
  • सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

संघ का कहना है कि शाखा का उद्देश्य लोगों को जोड़ना और अनुशासन सिखाना है, न कि राजनीति करना।

RSS का गठन क्यों हुआ? | RSS Ka Gathan Kyon Hua

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म उस दौर में हुआ जब भारत:

  • अंग्रेजों की गुलामी में था
  • सामाजिक रूप से बिखरा हुआ था
  • जाति और वर्ग के आधार पर बंटा हुआ था

उस समय की प्रमुख समस्याएँ:

  • हिंदू समाज का असंगठित होना
  • विदेशी शासन के खिलाफ सामूहिक चेतना की कमी
  • “फूट डालो और राज करो” की अंग्रेजी नीति

इन्हीं हालातों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी गई।

RSS क्या है?
RSS क्या है?

RSS के संस्थापक | डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक थे।

उनके बारे में अहम तथ्य:

  • जन्म: 1 अप्रैल 1889, नागपुर
  • पेशा: डॉक्टर
  • स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी
  • कई बार जेल यात्रा

डॉ. हेडगेवार का मानना था:

“राजनीतिक आज़ादी तभी टिकेगी, जब समाज संगठित और चरित्रवान होगा।”

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

1925 में RSS की स्थापना

27 सितंबर 1925, विजयादशमी के दिन, नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की औपचारिक स्थापना हुई।

शुरुआती दौर:

  • सीमित स्वयंसेवक
  • कोई बड़ा संसाधन नहीं
  • कोई प्रचार नहीं

लेकिन विचार मजबूत था, और यही वजह रही कि संगठन धीरे-धीरे फैलता गया।

RSS और भारत का स्वतंत्रता आंदोलन

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है —
क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया?

वास्तविक स्थिति:

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन के रूप में राजनीतिक आंदोलनों से दूर रहा
  • लेकिन कई स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से आंदोलन में शामिल हुए
  • कई स्वयंसेवकों ने जेल भी काटी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का फोकस था — भविष्य के भारत के लिए समाज को तैयार करना

RSS पर लगे प्रतिबंध और विवाद

🔴 1948 में प्रतिबंध

  • गांधी जी की हत्या के बाद
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा
  • बाद में जांच के बाद प्रतिबंध हटा

🔴 1975 का आपातकाल

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दोबारा प्रतिबंध
  • हज़ारों स्वयंसेवक जेल गए

इन घटनाओं ने संगठन को और मजबूत किया।

RSS और राजनीति का रिश्ता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुद को गैर-राजनीतिक कहता है, लेकिन उससे जुड़े कई संगठन हैं, जिन्हें संघ परिवार कहा जाता है।

प्रमुख संगठन:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  • ABVP
  • VHP
  • सेवा भारती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि ये संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, लेकिन वैचारिक प्रेरणा समान है।

RSS आज क्या करता है? | RSS Today Work

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ शाखाओं तक सीमित नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कार्य:

  • शिक्षा और संस्कार केंद्र
  • आपदा राहत (बाढ़, भूकंप, कोरोना)
  • ग्रामीण विकास
  • स्वास्थ्य सेवाएँ

सामाजिक समरसता अभियान

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